सुविचार

लौकिक रस के भोगी को प्रेमरस नहीं मिलता, भक्तिरस भी नहीं मिलता. जिसने "काम" का त्याग किया है वही रसिक हैजगत का रस कटु है, प्रेमरस ही मधुर है, जो इंद्रियों के अधीन है, उसे काल पकड़ता है राम राम रटते रहो जब तक घट मे प्राण ,कबहु तो दीनदयाल की भनक पङेगी कान ।। भगवान श्री क्र्ष्ण कहते है कि तू मेरी भक्ति कर मै तुझे मोक्ष प्रदान करुगा और अपने ह्रद्य मे निवास दूगा | भगवान की भक्ति से ही भगवान का रुप दिखाई देता है। भक्त भगवान की आत्मा हॆ, वह भगवान का जीवन ऒर प्राण है।
श्री मद् भागवत् कथा प्रवक्ता
परम श्रद्धेय श्री राम कृष्ण शास्त्री जी
About Ramkrishna Ji

Shri RamkrishnaShastriJi is a Spiritual Orator of ShrimadBhagwat Katha & Shri Ram Katha with His Melodious voice, the way shastriji sings Bhagwat Katha's diffrentshlokas, Ram Katha’s Chopai and Bhajans, makes the devotees spellbound.

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